भारत फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में रूस के बाद दूसरा देश बनने की ओर

Mon 27-Apr-2026,06:36 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

भारत फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में रूस के बाद दूसरा देश बनने की ओर India-Fast-Breeder-Reactor-Russia-Second-Country
  • भारत का PFBR प्रोजेक्ट परमाणु ऊर्जा के दूसरे चरण की शुरुआत है, जो थोरियम आधारित भविष्य की ऊर्जा रणनीति को मजबूत आधार देता है।

  • रूस के बाद भारत फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला दूसरा देश बनने की ओर, जिससे वैश्विक परमाणु तकनीक में स्थिति मजबूत होगी।

  • 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा लक्ष्य और SMR योजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता मिशन को गति दे रही है।

Delhi / New Delhi :

Delhi/ केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि रूस के बाद भारत व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला विश्व का दूसरा देश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

तमिलनाडु के कलपक्कम में विकसित 500 मेगावॉट का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) इस दिशा में सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया है। इस रिएक्टर ने 6 अप्रैल 2026 को पहली बार क्रिटिकैलिटी हासिल की, जो इसके सफल संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पड़ाव है।

यह रिएक्टर इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित और भाविनी द्वारा निर्मित किया गया है। यह भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण का प्रतीक है। इस तकनीक की खासियत यह है कि यह जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक ईंधन उत्पन्न करने की क्षमता रखता है, जिससे ऊर्जा उत्पादन अधिक कुशल और दीर्घकालिक बनता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि इस उपलब्धि के साथ भारत अपने विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है, जो परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तीसरे चरण का आधार है। वर्तमान में रूस ही एकमात्र देश है, जो वाणिज्यिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित कर रहा है, जबकि भारत इस तकनीक के उन्नत चरण में पहुंच चुका है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। इसके लिए सरकार लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसी नई तकनीकों को बढ़ावा दे रही है। “परमाणु मिशन” के तहत 20,000 करोड़ रुपये के निवेश से 2033 तक पांच SMR स्थापित करने की योजना है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा सेंटर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को निरंतर और स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता होगी, जिसमें परमाणु ऊर्जा अहम भूमिका निभाएगी। भारत का यह कदम न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर उन्नत परमाणु तकनीक में भारत की स्थिति को भी सुदृढ़ करेगा।